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बहुमत परीक्षण : कमलनाथ हारे तो बीजेपी में अंदरूनी लड़ाई बढ़ने का खतरा
March 15, 2020 • Admin • Madhy Pradesh

अगर भाजपा को फ्लोर टेस्ट पास कर जाती है तो बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी किसे मिलेगी? मुख्यमंत्री पोस्ट के लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम सबसे आगे है। लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा से उन्हें चुनौती मिल रही है।

मध्यप्रदेश में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल के बीच राज्यपाल लालजी टंडन ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को सोमवार को राज्यपाल के अभिभाषण के तत्काल बाद विश्वास प्रस्ताव पर मतदान कराने के निर्देश दिए हैं। टंडन ने निर्देश दिए हैं, “मध्यप्रदेश विधानसभा का सत्र 16 मार्च 2020 को प्रात: 11 बजे प्रारंभ होगा और राज्यपाल के अभिभाषण के तत्काल बाद एकमात्र कार्य विश्वास प्रस्ताव पर मतदान होगा।” ऐसे में अगर कमलनाथ इस बहुमत परीक्षण में हार जाती है तो बीजेपी में अंदरूनी लड़ाई बढ़ सकती है।

अगर भाजपा को फ्लोर टेस्ट पास कर जाती है तो बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी किसे मिलेगी? मुख्यमंत्री पोस्ट के लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का नाम सबसे आगे है। लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा से उन्हें चुनौती मिल रही है। नरोत्तम मिश्रा को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीब माना जाता है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर का नाम भी सामने आए है। तोमर ने 22 कांग्रेसी विधायकों को बागी बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

तोमर और मिश्रा के करिबियों का मानना है कि शिवराज सिंह चौहान तीन बार राज्य के सीएम रेह चुके हैं ऐसे में अब किसी और नेता को मौका मिलना चाहिए। बता दें यदि शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में लौटते हैं, तो कथित तौर पर माना जाएगा कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने उनके प्रति लंबे समय से चल रहे मतभेद को खत्म कर दिया है।

इंडियन एक्सप्रेस के कॉलम इनसाइड ट्रैक में छपी कूमी कपूर की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2018 में मध्य प्रदेश के चुनावों के बाद, चौहान को भरोसा हो गया था कि वह अभी भी सरकार बनाने का प्रबंधन कर सकते हैं क्योंकि कांग्रेस और भाजपा के बीच मात्र पांच सीटों का अंतर था। लेकिन अंतिम परिणाम घोषित होने से पहले ही, मोदी ने हार मान ली और चौहान के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इसके बाद हालांकि चौहान ने संकेत दिया कि वह राज्य की राजनीति में सक्रिय रहना चाहते हैं, लेकिन भाजपा नेतृत्व ने गोपाल भार्गव को विधानसभा दल का नेता नियुक्त किया।

साल 2014 में भाजपा का नेतृत्व करने के लिए और ओबीसी चेहरे के रूप में मोदी को चुनौती देने के लिए लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज ने शिवराज सिंह चौहान का नाम लिया था। जिसके लिए मोदी-शाह की जोड़ी ने उन्हें माफ नहीं किया था।

 

साभार - जनसत्ता