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ढाई महीने में चीन ने अपने फैलाए कोरोना के रायते को कैसे काबू कर लिया?
March 21, 2020 • Admin • World

वुहान. चीन का एक शहर. कई बड़े उद्योगों का केंद्र. दुनिया की कई बड़ी-बड़ी कंपनियों का सामान इसी शहर में बनता है. इसलिए वुहान को दुनिया की फैक्ट्री भी कहा जाता है. 31 दिसंबर, 2019 को जब दुनिया नए साल का इंतजार कर रही थी, तब चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO को एक बीमारी के बारे में पहली बार बताया. चीन ने कहा कि वुहान शहर में निमोनिया जैसी बीमारी के कई मामले सामने आए हैं. जो लोग इस बीमारी की चपेट में आए वे शहर के हुनान सीफूड मार्केट में काम करते थे. हुनान सीफूड मार्केट पूरी दुनिया में मशहूर (कुख्यात) है. यहां पर सभी तरह के जीव-जंतुओं का मांस बेचा जाता है. एक जनवरी को मार्केट को बंद कर दिया गया.

नए साल के सातवें दिन यानी 7 जनवरी, 2020 को बीमारी की वजह का पता चला. चीन ने बताया कि 2019-nCoV यानी नोवेल कोरोना वायरस की वजह से लोग बीमार पड़ रहे थे. यह बीमारी उसी वायरस परिवार का हिस्सा थी जिससे 2002 में सार्स फैला था.

11 जनवरी को चीन ने बताया कि उसके यहां कोरोना वायरस से पहली मौत हुई. मौत 9 जनवरी को हुई थी लेकिन चीन ने दो दिन बाद बताया. मरने वाले की उम्र 61 साल थी. सीफूड मार्केट में खरीदारी के दौरान वह वायरस की चपेट में आया. इसके बाद तो मामले तेजी से बढ़े. WHO के अनुसार, 15 फरवरी तक वुहान की बड़ी आबादी कोरोना की चपेट में आ गई.

13 फरवरी को एक ही दिन में 15,000 से ज्यादा मामले सामने आए. शुरू में चीन बीमारी को छुपा रहा था. लेकिन मामला हाथ से निकलने पर उसने तेजी से कदम उठाए. उसने वुहान शहर का संपर्क काट दिया. शहर के सभी लोगों को घरों में बंद कर दिया. सात दिन में नए अस्पताल खड़े कर दिए. और उनमें बीमार लोगों को भर्ती किया.

अभी केवल 7263 लोग ही बीमार!

थोड़ा आगे बढ़ते हैं. 19 मार्च, 2020. इस दिन चीन ने बताया कि उसके यहां कोरोना का एक भी नया स्थानीय मामला सामने नहीं आया है. चीन के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि पिछले 24 घंटों में कोरोना के 34 मामले आए. लेकिन ये मामले दूसरे देशों से आए लोगों के हैं. इसके बाद से कोरोना से लड़ने के चीनी तरीकों की काफी चर्चा हो रही है.

WHO के अनुसार, चीन में अब तक कोरोना के 81,174 मामले आए हैं. यहां पर 3242 लोगों की मौत हुई है. चीन का कहना है कि अभी उसके यहां कोरोना वायरस के केवल 7263 एक्टिव मामले हैं. वहीं पूरी दुनिया में अभी तक 2,07,855 मामले कोरोना वायरस इंफेक्शन के आए हैं. 8648 लोगों की जान जा चुकी है. 166 देशों से कोरोना के मामले आ चुके हैं.

चीन क्या कदम उठाए

बीमारी की पहचान होने और इसकी गंभीरता पता चलने के बाद चीन ने तेजी से काम किया. उसने वुहान के साथ ही चीबा, हुआंगगांग और इझू में सब कुछ बंद कर दिया. सभी के तरह के यातायात को बंद कर दिया गया. लोगों के घरों से बाहर निकलने पर रोक लगा दी. खाने-पीने के ज़रूरी सामान घर पर ही पहुंचाए गए. घर-घर जाकर लोगों की जांच शुरू की गई. जिसमें जुकाम-बुखार के लक्षण भी थे, उन्हें फौरन क्वारंटीन कर निगरानी में रखा गया. कोरोना से पॉजीटिव लोगों को अलग-थलग रखा गया. उन्हें आपस में मिलने से भी रोक दिया गया. वुहान में बाहर से किसी के आने-जाने पर बैन लगा दिया गया.

वुहान को एक बख्तरबंद किले की तरह बना दिया. लोगों के इलाज के लिए 10 दिन में दो बड़े अस्पताल खड़े कर दिए गए. इनमें से एक 1600 बेड तो दूसरा 1000 बेड का था. बाकी के शहरों जैसे शंघाई, बीजिंग में भी कड़े कदम उठाए गए. टेलीकॉम कंपनियों के जरिए लोगों के आने-जाने पर नज़र रखी गई.

बीमार व्यक्ति बताने पर इनाम

सभी के लिए क्यूआर कोड तैयार किया गया. इसमें संबंधित व्यक्ति की सारी डिटेल थी. जैसे- नाम, शरीर का तापमान और यात्रा का इतिहास. किसी दफ्तर और घर में जाने से पहले इसे दिखाना पड़ता. वीचैट और वीवो जैसा सोशल मीडिया साइट के जरिए लोगों से बीमार व्यक्ति के बारे में बताने को कहा गया. कुछ शहरों में तो बीमार व्यक्ति के बारे में बताने पर इनाम भी दिया गया.

चीन सरकार ने कंपनियों से भी सहयोग लिया. कंपनियों ने ऐसी तकनीक तैयार की जिससे भीड़ में मौजूद बिना मास्क पहने व्यक्ति की पहचान की जा सके. स्वास्थ्य से जुड़ी ऐप के जरिए दूसरे लोगों को बीमार शख्स के बारे में बताया गया कि वह कितना दूर है. या फिर वे बीमार के संपर्क में तो नहीं आए हैं.

सरकार ने कोरोना वायरस की जांच फ्री कर दी. साथ ही ऐलान कर दिया कि जिन लोगों का इंश्योरेंस नहीं हैं उनका उपचार सरकार कराएगी. 2002 में सार्स नाम की बीमारी भी चीन से ही फैली थी. उस समय इलाज के लिए फीवर अस्पताल खोले गए थे. कोरोना वायरस की जांच के लिए इन अस्पतालों की क्षमता को बढ़ा दिया गया. यहां पर एक-एक दिन में 40-40 हजार लोगों की जांच की गई. चीन की सरकार ने देश के बाकी हिस्सों से मेडिकल स्टाफ को वुहान में काम पर लगा दिया.

अब वुहान में इनमें से कुछ पाबंदियों को हटा दिया गया है. वहां पर कारखाने और फैक्ट्रियों में फिर से काम शुरू हो गया है. हालांकि स्कूल-कॉलेज अभी भी बंद है. नए साल के बाद से ही चीन में स्कूल बंद हैं. पिछले दिनों राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी वुहान का दौरा किया था. जो नए अस्पताल बनाए गए, उन्हें बंद किया जा रहा है. क्योंकि उनके लिए अब मरीज नहीं हैं.

खुद को सॉफ्ट पावर के रूप मे पेश रहा चीन

कोरोना वायरस आउटब्रेक के बाद चीन खुद को सॉफ्ट पावर के रूप में पेश कर रहा है. कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों की वजह से शुरुआत में चीन की काफी बदनामी हुई थी. जिस तरह से उसने बीमारी को हल्के में लिया और फिर लॉकडाउन किया. उस पर पश्चिमी देशों ने चीन की काफी आलोचना की. पश्चिमी मीडिया ने भी चीन के खिलाफ कई लेख लिखे. लेकिन अब चीन मदद का हाथ बढ़ाकर खुद का दामन साफ करने की कोशिश कर रहा है.

पिछले कुछ दिनों में चीन ने दूसरे देशों की मदद का बीड़ा उठाया है. उसने कई देशों में बोरे भर-भरकर मास्क भेजे हैं. डॉक्टर्स की टीम रवाना की है. यहां तक कि कई देशों में वेंटीलेटर भी भेजे हैं. चीन के अरबपति कारोबारी जैक मा ने अमेरिका को 10 लाख मास्क और हजारों टेस्ट किट दान में भेजी हैं. इटली, स्पेन, बेल्जियम, फ्रांस जैसे देशों में भी चीन ने मास्क भेजे हैं. इन मास्क पर लिखा है- ‘एकजुटता से ताकत मिलती है.’

चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग यूरोप के कई देशों के प्रमुखों से लगातार बात कर रहे हैं. मदद का आश्वासन दे रहे हैं. स्पेन के पीएम पेड्रो सांचेज से बातचीत में उन्होंने कहा कि ‘बारिश के बाद सुबह जरूर आती है.’ स्पेन भी कोरोना की चपेट में है. इसी तरह इटली के पीएम ज्यूसिपे कोंटे से उन्होंने फोन पर बात की. और मिलकर कोरोना से लड़ने का भरोसा दिलाया.

दूसरी तरफ वह आक्रामक तरीके से अमेरिका से टक्कर ले रहा है. अमेरिका कोरोना को चीनी वायरस कह रहा है. इस पर पलटवार करते हुए चीन ने कहा कि यह वायरस अमेरिका से ही चीन आया. बता दें कि अमेरिका में भी कोरोना के कई मामले सामने आए हैं.

अमेरिकी अखबार लिख रहे हैं कि चीन नाटकीय अंदाज में अपनी छवि सुधारने का काम कर रहा है. अब वह कोरोना का दाग हटाकर खुद को मसीहा के रूप में पेश कर रहा है. देखना होगा कि आने वाले समय में चीन क्या करता है.