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हाथियों का जोड़ा पहुंचा करेली, पकडऩे बनाई रणनीति
March 4, 2020 • Admin • Madhy Pradesh
नरसिंहपुर। जिले में गन्ने की मिठास के कायल हुये गजराज नरसिंहपुर को छोडऩे का मन ही नहीं कर रहे हैं। सतपुड़ा के ऊंघते अनमने घने जंगलों में गत चार माहों से जंगली हाथियों की हलचल हो रही है। भारी भरकम व ताकतवर जंगली हाथियों की मौजूदगी आम नागरिकों किसानों व वन विभाग सहित पूरे प्रशासकीय अमले कों चिंता में डाले हुये हैं। उल्लेखनीय है कि नरसिहपुर एवं छिंदवाड़ा सिवनी जिलों की सीमा पर फैले इस सतपुड़ के भारी घने जंगलों में शाकाहारी वन्य जीव जैंसे हिरण, चिंकारा, नीलगाय, वारहसिंगा सहित हिंसक वन्य जीवों शेर तेंदुआ आदि की मौजूदगी है, जो कि जंगली जैव पिरामिड के लिए उपयुक्त है। इनके अतिरिक्त अब यहां पर जंगली हाथियों का एक जोड़ा ने काफी समय से यहां पर डेरा डाल रखा है जो कि किसानों की खड़ी फसलों को भी काफी नुकसान पहुंचा चुका है। पहले यह बचई एवं मुगवानी के जंगलों में देखा गया था लेकिन सोमवार की सुबह यह जोड़ा जिले की करेली तहसील के अंतर्गत दिल्हरी, वरखोहा, हथनापुर, सिमरिया के जंगलों से होते हुये करेली शुगर में पास खेतों में देखा गया है। 
गत चार माहों से दो जंगली हाथियों का डेरा नरसिहंपुर जिले की सीमा में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहा है। वन विभाग ने बताया कि हाथियों का यह जोड़ा उड़ीस छत्तीसगढ के घने जंगलों से अपने साथियों से विछड़कर यहां पर आ पहुंचे हैं। लेकिन यहां पर उनको गन्ना सहित अन्य खाद्य आसानी से मिल जाने के कारण वे यहां से वापिस नही जा रहे हैं। पिछलों माहों से वे बचई एवं मुगवानी के जंगलों में विचरण कर रहे थे। लेकिन रविवार एवं सोमवार की रात्रि को वे करेली तहसील के अंतर्गत शहर के काफी नजदीक मौजूद करेली शुगरमिल के पीछे खेतों में देखे जाने एवं फसलों की नुकसानी को लेकर शहर एवं ग्रामों के किसानो और आम नागरिकों में भारी चिंता के साथ जानमाल की नुकसानी का खौप फैल गया है। इन गजराजों को कानूनी प्रावधानों एवं सुरक्षा कारणों  से इनसे न तो कोई छेड़छाड़ कर सकता है और न ही इन्हे भगाने के लिए कोई प्रयास। यहां तक कि स्थानीय  वनविभाग अमला भी इनके लिए अपनी तरफ से कोई कोशिश करने का साहस नही जुटा पा रहा है। इस हेतु वन विभाग का प्रशिक्षित अमला ही कोई कदम उठा सकता है और इस प्रकार का प्रशिक्षित कोई भी अमला जिला में मौजूद नही होने के कारण बाहर से प्रशिक्षत अमले के आने का इंतजार किया जा रहा है। फिलहाल इन दोनों गजराजों की निगरानी द्रोंण कैमरों की सहायता से वन विभाग द्वारा की जा रही है। 
बताया जा रहा हैं कि उड़ीसा से छत्तीसगढ़ होते हुए मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में विचरण कर रहा जंगली हाथियों का यह जोड़ा पिछले कई माह से लगातार किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है वहीं दूसरी ओर इनमें आमजनों की जान का खतरा भी बना रहता है। पिछले कई दिनों से बचई परिक्षेत्र में देखे जा रहे दो हाथी सोमवार को करेली क्षेत्र में करेली में शुगर मिल के पीछे के देखे जाने की खबर फैलने के साथ वहां लोगों का हुजूम लग गया किंतु लोगों को सतर्कता बरतते हुए उनके पास नहीं जाने दिया गया। लेकिन इनके शक्कर नदी की ओर जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। 
इन दोनों हाथियों को पकडऩे के लिए वनविभाग ने जिला स्तरीय बैठक कर रणनीति तैयार कर ली है। वन मण्डल अधिकारी एमआर बघेल ने बताया कि हाथियों को पकडऩे बैठक की गई हैं जिसमें जल्द ही 6-7 प्रशिक्षित हाथियों के दल को जिले में बुलाया जाकर उनकी घेराबंदी कर उन्हें पकड़े जाने की योजना बनाई गई है। जिसमें इन्हे सुरक्षित ढंग से पकडऩे में लगभग दो सप्ताह का समय लग सकता है।