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सेवा, साधना और समर्पण के कारण राम-भक्त हनुमान और गांधी जी आराध्य हैं
January 31, 2020 • Admin • Madhy Pradesh

गांधी जी और हनुमान जी अपनी सेवा, साधना और समर्पण भावना से लोगों के आराध्य हैं। सत्य, अहिंसा और राष्ट्रभक्ति इनके व्यक्तित्व और कृतित्व के आधार हैं। ये विचार मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने आज पुरानी विधानसभा परिसर मिंटो हाल में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्य-तिथि पर महानिर्वाण हनुमान चालीसा के सवा करोड़ जप कार्यक्रम में व्यक्त किए। यह कार्यक्रम 'हमारे हनुमान' सांस्कृतिक मंच भोपाल द्वारा आयोजित किया गया था। जनसंपर्क मंत्री श्री पी.सी. शर्मा एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री कमलेश्वर पटेल भी इस मौके पर उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि राम-भक्त हनुमान का उनके जीवन में विशेष महत्व रहा है। गांधी जी मेरे सदैव आदर्श रहे हैं। श्री नाथ ने कहा कि  मेरी आस्था के केन्द्र इन आराध्य पुरुषों ने मुझे हमेशा प्रेरणा प्रदान की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी जी ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सत्य, अहिंसा और राष्ट्रभक्ति का जो नारा दिया था उसने उस समय के ब्रिटिश साम्राज्य को हिला दिया था। आज गांधी जी के इन्हीं विचारों की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। गिरते हुए सामाजिक मूल्य हमारे सामने एक बड़ी चुनौती है। हमें इसका सामना राम-भक्त हनुमान जी एवं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के विचारों और भावनाओं को आत्मसात कर करना है।

महानिर्वाण हनुमान चालीसा के सवा करोड़ जप समारोह के मुख्य वक्ता पंडित विजय शंकर मेहता ने 'महानिर्वाण - एक शाम राष्ट्रभक्त के नाम' विषय पर अपने व्याख्यान में कहा कि हनुमान जी और गांधी जी के मन, वचन, कर्म में साम्य है। पंडित मेहता जी ने कई प्रसंगों और कृतियों से भगवान हनुमान और गांधी जी के आचरण-व्यवहार का उल्लेख करते हुए कहा कि गांधी जी जहाँ मौलिक संस्कृति के प्रतीक थे वहीं हनुमान जी अवतार परंपरा के एक जीवित महापुरुष हैं। दोनों आज भी हमारे सामने उपस्थित हैं। दोनों का व्यक्तित्व  इतना प्रभावशाली था कि अपने समय के सर्वशक्तिमान उनके आगे कांपते थे फिर वो चाहे रावण हो या फिर ब्रिटिश साम्राज्य।