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श्योक और गलवान नदी पर इंडियन आर्मी ने बनाया 60 मीटर लंबा ब्रिज, एलएसी पर पहुंच आसान होगी
June 26, 2020 • Admin

नई दिल्ली. लद्दाख में चीन से वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी तनाव के बीच भारत की तीनों सेनाएं सुपर अलर्ट मोड में है. इस बीच खबर है कि सेना ने गलवान घाटी (Galwan valley) में ब्रिज तैयार कर दिया है. नेवी भी सबमैरीन कैपेसिटी को तेजी से बढ़ा रही है. वहीं, एयरफोर्स चीफ मार्शल का कहना है कि हम हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है.भारतीय सेना के सूत्रों के मुताबिक, पूर्वी लद्दाख क्षेत्र के श्योक नदी पर एक पुल का निर्माण पूरा कर लिया गया है.जहां पर श्योक और गलवान नदी (Galwan River) मिलती है.
ये उसके काफी करीब है.ये पेट्रोलिंग प्वाइंट 14 की ओर जाने वाले ट्रैक पर नहीं है.बताया जा रहा है कि आर्मी के इसी ढांचे को लेकर बलवान घाटी में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है.उधर, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी नेवी ने सतर्कता बढ़ा दी है.
 

हर हाल में पूरा करना था

15 जून की खूनी झड़प वाली रात में घटना के कुछ घंटे बाद इंडियन आर्मी के जवानों ने गलवान नदी पर पुल के निर्माण कार्य को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. सेना को इस निर्माण कार्य को किसी भी कीमत पर पूरा करने का निर्देश मिला था.
 

60 मीटर लंबा है ब्रिज

भारतीय सेना के बहादुर जवानों ने चीन से भारी तनाव के बीच 60 मीटर लंबे इस ब्रिज को बनाकर तैयार कर दिया. सेना ने बकायदा 2 घंटे तक वाहनों के जरिए इस पुल का टेस्ट भी किया. इस पुल की मदद से भारतीय सेना गलवान घाटी और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पहुंच काफी आसान हो जाएगी. इसे चीन की ओर से अत्यधिक उकसावे और हिंसा के बावजूद भारत के लिए बचाव का जरिया माना जा रहा है.
 

नेवी पूरी तरह से सतर्क

चीन के साथ बढ़ते गलवान घाटी पर टकराव के बीच अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में भी भारतीय नौसेना ने सतर्कता बढ़ा दी है. वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी तनाव के बीच भारतीय नौसेना के कई वरिष्ठ अधिकारी भी यह मानते हैं चीनी सेना के नेवी फ्रंट खोलने पर अंडमान को खतरा हो सकता है. ऐसी स्थितियों में अंडमान निकोबार द्वीप समूह के आसपास के समुद्री इलाकों में नेवी पूरी सतर्कता बरत रही है.
 

मिलिट्री बेस बना रहा चीन

नेवी के अधिकारियों का मानना है कि गलवान चाटी पर मात खा चुका चीन किसी और रास्ते से भारत को नुकसान पहुंचा सकता है. इसकी आशंका बनी हुई है. चीन ने बीते दिनों कई द्वीपों पर अपने मिलिट्री बेस बनाने की शुरुआत की है और अब वह ऐसे और इलाकों की तलाश कर रहा है, जहां के द्वीप समूह का वह सामरिक स्थितियों में इस्तेमाल कर सके.
 

LAC निगरानी पर देना होगा जोर

नेवी के अफसरों का मानना है कि इंडियन मेनलैंड से 700 नॉटिकल माइल्स दूर अंडमान निकोबार पर और ध्यान देने की जरूरत है. कारण ये भी है कि अगर कोई आपात स्थिति होती है तो किसी भी सेट को यहां भेजने के लिए मौसम और समय की दुश्वारियों का ध्यान रखना होगा. जल्द से संसाधनों का इंतजाम करना होगा.
 

गलवान घाटी पर चीन के दावे को भारत ने किया खारिज

भारत ने गलवान घाटी में चीन के दावों को खारिज किया है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि चीन LAC के बारे में बढ़ा-चढ़ाकर दावा कर रहा है, जो भारत को मंजूर नहीं है. भारत कहा कि मई 2020 से चीन की सेना एलएसी के गलवान घाटी इलाके में भारतीय सेना की सामान्य और परंपरागत पेट्रोलिंग में बाधा डाल रही थी. मई में चीनी पक्ष ने LAC में अतिक्रमण की कोशिश की तब उसे मुहंतोड़ जवाब दिया गया. बता दे कि चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा था कि बलवान घाटी चीन का हिस्सा है और भारत वहां जबरन रोड बना रहा है.
 
 

हर चुनौती के लिए एयरफोर्स तैयारी

एयरफोर्स के एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने शनिवार को हैदराबाद के नजदीक डुंडीगल स्थित एयरफोर्स अकेडमी में कंबाइंड ग्रेजुएशन परेड को संबोधित करते हुए कहा कि एयरफोर्स ने भारत चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आसपास पूरे हालात की समीक्षा की है और किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार व प्रतिबद्ध है.
उन्होंने कहा कि एयरफोर्स गलवान घाटी में अपने बहादुर जवानों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देगी.उन्होंने कहा, ‘सबको यह बात स्पष्ट होनी चाहिए कि किसी भी परिस्थिति के लिए हम पूरी तरह तैयार और तैनात हैं.मैं देश को भरोसा दिलाता हूं कि हम अपना शत प्रतिशत देने के लिए तैयार हैं. बात LAC की हो या LAC से परे तैनाती की, हमें पूरे हालात पता हैं.उनकी तैनाती कितनी है, कैसी है और कहां है, हमें जानकारी है. हमने पूरा विश्लेषण किया है और तैनाती के कारण पैदा होने वाली आपात स्थिति से निपटने के लिए हर जरूरी कदम उठाया गया है.
साभार - ASE News